Glaucoma (ग्लूकोमा): Symptoms, Causes & Treatment Guide

ग्लूकोमा एक नेत्र रोग है जिसमें आंख के अंदर का दबाव (इंट्राओकुलर प्रेशर) बढ़ जाता है, जिससे ऑप्टिक तंत्रिका को नुकसान होता है और दृष्टि (विजन) में कमी आ सकती है। यदि इसे समय पर इलाज न किया जाए तो यह स्थायी अंधत्व का कारण बन सकता है।

ग्लूकोमा के कारण:

  1. आंख का उच्च दबाव: आंख के अंदर का दबाव बढ़ने से ऑप्टिक तंत्रिका को नुकसान होता है।
  2. आनुवंशिकी: परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास होने पर इसका खतरा बढ़ जाता है।
  3. उम्र: 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ग्लूकोमा होने का खतरा अधिक होता है।
  4. अन्य स्वास्थ्य समस्याएं: मधुमेह, उच्च रक्तचाप, और हृदय रोग ग्लूकोमा के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

ग्लूकोमा के लक्षण:

  • प्रारंभिक अवस्था में आमतौर पर कोई लक्षण नहीं होते।
  • धीरे-धीरे किनारों से दृष्टि का खोना (Peripheral Vision Loss)।
  • देखने में धुंधलापन।
  • आंखों में दर्द और लालिमा।
  • सिरदर्द।
  • रंगीन घेरों का दिखना (Halos around lights)।

निदान (Diagnosis):

  1. आई प्रेशर टेस्ट (Tonometry): आंख के अंदर के दबाव को मापने के लिए।
  2. ऑप्टिक तंत्रिका की जांच (Ophthalmoscopy): ऑप्टिक तंत्रिका की स्थिति की जांच के लिए।
  3. पेरिमेट्री टेस्ट (Visual Field Test): दृष्टि के क्षेत्र की जांच करने के लिए।
  4. गोनियोस्कोपी (Gonioscopy): आंख के ड्रेनेज एंगल की जांच के लिए।

उपचार (Treatment):

  1. दवाएं (Eye Drops): आंख के अंदर के दबाव को कम करने के लिए।
  2. लेजर थेरेपी: ड्रेनेज एंगल को सुधारने के लिए।
  3. सर्जरी: आंख से फ्लुइड के बहाव को बढ़ाने के लिए।

निवारण उपाय (Prevention Tips):

  1. नियमित नेत्र परीक्षण: 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित नेत्र जांच करवाएं।
  2. स्वस्थ जीवनशैली: संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, और धूम्रपान छोड़ना।
  3. आंखों की सुरक्षा: आंखों को चोट से बचाने के लिए सुरक्षात्मक चश्मे का उपयोग करें।
  4. संपर्क लेंस का सही उपयोग: लेंस को साफ और ठीक से उपयोग करें।

FAQs

1. ग्लूकोमा को ‘साइलेंट किलर’ क्यों कहा जाता है?

ग्लूकोमा को ‘दृष्टि का साइलेंट चोर’ (Silent Thief of Sight) कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती चरणों में कोई दर्द या स्पष्ट लक्षण नहीं होते। मरीज को धीरे-धीरे अपनी साइड की दृष्टि (Peripheral Vision) खोने का पता तब चलता है जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है।

2. ग्लूकोमा के मुख्य लक्षण क्या हैं?

हालांकि शुरुआती लक्षण कम होते हैं, लेकिन बीमारी बढ़ने पर ये संकेत दिख सकते हैं:

  • आंखों में या उसके आसपास तेज दर्द।

  • धुंधली दृष्टि (Blurred Vision)।

  • रोशनी के चारों ओर इंद्रधनुष जैसे घेरे (Halos) दिखना।

  • अचानक सिरदर्द, जी मिचलाना या उल्टी आना।

  • आंखों का लाल होना।

3. ग्लूकोमा होने का मुख्य कारण क्या है?

हमारी आंखों में एक तरल पदार्थ (Aqueous Humor) लगातार बनता और निकलता रहता है। जब इस तरल के निकलने का रास्ता बंद हो जाता है, तो आंखों के अंदर दबाव (Intraocular Pressure) बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ दबाव ऑप्टिक नर्व (जो मस्तिष्क को संकेत भेजती है) को डैमेज कर देता है।

4. किन लोगों को ग्लूकोमा का खतरा ज्यादा होता है?

  • 40 वर्ष से अधिक आयु: उम्र बढ़ने के साथ जोखिम बढ़ता है।

  • अनुवांशिकता: यदि परिवार में किसी को ग्लूकोमा रहा हो।

  • अन्य बीमारियां: डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी वाले लोग।

  • दवाएं: लंबे समय तक स्टेरॉयड (आई ड्रॉप्स या गोलियां) का इस्तेमाल।

  • आंख की चोट: अतीत में आंखों में लगी कोई गंभीर चोट।

5. क्या ग्लूकोमा से खोई हुई दृष्टि वापस आ सकती है?

दुर्भाग्य से, ग्लूकोमा के कारण ऑप्टिक नर्व को जो नुकसान हो चुका है, उसे ठीक नहीं किया जा सकता। उपचार का मुख्य उद्देश्य आंखों के दबाव को कम करना और बची हुई दृष्टि को सुरक्षित रखना होता है।

6. ग्लूकोमा का निदान और उपचार क्या है?

  • निदान: एक नेत्र विशेषज्ञ ‘टोनोमेट्री’ (दबाव मापने) और ‘ऑप्टिक नर्व चेकअप’ के जरिए इसका पता लगाता है।

  • उपचार: इसमें दवाएं (आई ड्रॉप्स), लेजर थेरेपी या कुछ मामलों में सर्जरी शामिल है ताकि तरल पदार्थ की निकासी को सुधारा जा सके।

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